इतिहास

   

हम महालेखाकार उत्तर-पश्चिमी प्रांत एवं अवध, आगरा के उत्तराधिकारी है | तत्कालीन महालेखकार श्री जी०लूशींगटन ने अकटूबर १८६२ में इस कार्यालय को इलाहाबाद स्थानांतरित किया गया था | उन दिनो रेलवे की सुविधा ना होंने के कारण अभिलेख आदि नावो द्वारा लाए गये थे | उस समय इसे कार्यालय महा लेखाकर संयुक्त प्रांत एवं अवध के नाम से जाना जाता था| लेखा कार्य के पृथकीकऱण के परिणाम स्वरूप प्रांतीय सरका के मुख्य लेखा अधिकारी ने १ अप्रैल १९२७ से लेखा कार्य का उत्तरदायित्व स्वयं ले लिया और कार्यालय का नाम ' निदेशक लेखा परीक्षा सयुक्त प्रांत' रखा | संयुक्त प्रांत मे केंदीय लेन देनो के लेखकरण हेतु केंद्रीय भुगतान एवं लेखा कार्यालय के प्रभारी की भी नियुक्ति की गयी | भारत सरकार के वित्त्त विभाग मे विशेष कार्याधिकारी के नियंत्रण में २४ जनवरी १९२७ को भुगतान एवं लेखा अधिकारी के एक पृथक संवर्ग का निर्माण किया गया |
 

पॉच वर्ष की लघु अवधि में यह प्रयोग असफल सिद्भ हुआ और १ नवम्बर १९३१ को महालेखाकार संयुकत प्रांत का कार्यालय अस्तित्व में आया | ३० जनवरी १९५० से यू पी का अर्थ युनाइटेड प्रॉविन्सस (संयुक्त प्रांत) के स्थान पर उत्तर प्रदेश हो गया |

३० नवम्बर १९७१ को कार्य के आधार पर कार्यालय का विभाजन महालेखाकार प्रथम एवं महालेखकार द्वितीय के रूप मे हो गया| राजस्व केख परीक्षा तथा व्यय मे होने वाले भारी वृधि को दृष्टिगत रखते हुए १ फरवरी१९७७ को कार्यालय महालेखाकार तृतीय बना कार्यालय का अगला पुनेर्गठन किया गया | जिससे १९७२-७३ से राजस्व प्राप्तियो का लेखा परीक्षा प्रतिवेदन तथा १९७३-७४ से लेखा परीक्षा प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) अलग से प्रकाशित हो रहा है |

१ मार्च १९८४ से भारतीय लेखा तथा लेखा परीक्षा विभाग का पुनर्गठन किया गया | जिसके फलस्वरूप कार्यालय महालेखा परीक्षा त्तथा लेखा एवं हक़दारी कार्यालय मे विभाजित हो गया| उस तिथि से कार्यालय महालेखाकार (लेखा परीक्षा )- प्रथम तथा महालेखाकार (लेखा परीक्षा)-द्वितीय, इस प्रकार अस्तित्व मे आए | कार्यालय महालेखाकार तथा लेखा एवं हक़दारी कार्यालय के साथ पुराने भवनो मे स्थित था | जनवरी १९९६ मे लेखापरीक्षा कार्यालायो को 'सत्यनिष्टा भवन' मे ले जाया गया | अगस्त-२००२ मे कार्यालय महालेखाकार (लेखापरीक्षा)-प्रथम कार्यालय प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा)- प्रथम के रूप मे उच्चीकृत हुआ तथा सितम्बर २००४ से कार्यालय का नाम प्रधान महालेखाकार (सिविल ऑडिट) रखा गया | कार्यालयों के पुनुर्गठन के सम्बन्ध मे मुख्यालय के पत्रांक १०९-एस एम् यू/पी पी /५-२०११ के अनुसार कार्यालय का नाम दिनांक ०२.०४.२०१२ से नाम परिवर्तित करके कार्यालय प्रधान महालेखाकार (सामान्य एवं सामाजिक सेक्टर लेखापरीक्षा ) उ० प्र० इलाहाबाद कर दिया गया है |
 

कार्यालय प्रधान महालेखाकार (सिविल आडिट) राज्य सरकार से सिविल विभागो की लेखा परीक्षा अवाम राज्य मे स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयो की लेखा परीक्षा के लिया उत्तरदायी है | राज्य सरकार के स्वायत निकाय एवं केंद्र सरकार के जो स्वायत निकाय राज्य मे स्थित है; उनके लेखा परीक्षा का कार्य भी इस कार्यालय द्वारा किया जाता है |

कार्यालय प्रधान महालेखाकार (सिविल आडिट) राज्य सरकार से सिविल विभागो की लेखा परीक्षा अवाम राज्य मे स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयो की लेखा परीक्षा के लिया उत्तरदायी है | राज्य सरकार के स्वायत निकाय एवं केंद्र सरकार के जो स्वायत निकाय राज्य मे स्थित है; उनके लेखा परीक्षा का कार्य भी इस कार्यालय द्वारा किया जाता है |

कार्यालय महालेखाकार (वाणिज्यिक एंव प्राप्ति लेखा परीक्षा) को तथा निगमो (विधुत निगम हित) राजकीय सडक परिवहन निगम, उ० प्र० आवास विकास परिषद आदि की लेखा परीक्षा का कार्य सौंपा गया है |इन लेखा परीक्षाओ का नियंत्रण लखनऊ स्थित मुख्यालय दॄवारा किया जाता है| इनके अतिरिक्त यह कार्यालय राज़य एवं केन्द की प्राप्तियों की लेखा परीक्षा के लिए भी उत्तरदायी है| प्राप्ति लेखा परीक्षा विंग इलाहाबाद मे स्थित है |

जुलाई २००४ मे मुख्यालय द्वारा प्रधान महालेखाकार(सिविल लेखा परीक्षा) के प्रशासनिक एवं तकनीकी नियंत्रण मे वरिष्ठ उप महालेखाकार (स्थानीय निकाय लेखा परीक्षा एवं लेखा) का एक कार्यालय अलग बनाया गया | लेखा तथा हकदारी के उत्तरदायित्व को दो कार्यालय महालेखाकार (लेखा एवं हक०)-प्रथम तथा महालेखाकार(लेखा व हक०)-द्वितीय मे बॉटा गया| सितम्बर १९८५ से अगस्त २००२ तक (लेखा व हक०)-प्रथम कार्यालय के प्रमुख, प्रधान महालेखाकार थे |

लेखा एवं हकदारी कायाँलय मुख्य रूपसे एक शानदार ऐतिहासिक इमारत स्थित है, जहॉ पहले उच्च न्यायालय हुआ करता था|
 

वन इंजिनियरिंग का यह उत्कृष्ट नमूना १८७२ में लाडँ पीले द्वारा डिज़ाइन किये गये एक ही प्रकार के चार भवनों में से एक है | ऐसा विश्वास किया जाता है कि ये चारों भवन भूमि गत मार्ग द्वारा जुड़े हैं | १८५७ में स्वाधीनता के प्रथम संग्राम के दौरान अँग्रेज़ों को इलाहाबाद में सर्वमान्य मौलवी लियाक़त को चायल के जमीदारों का समर्थन प्राप्त था|अब चायल एक तहसील है, जिसके भू-अभिलेखों के अनुसार हमारा परिसर इसके अधिकार क्षेत्र में है| मौखिक इतिहास के अनुसार हमारा कार्यालय वहीं स्थित है, जहाँ बहुत से भारतीय शहीद हुए | हमारे विभाग के श्री डी० जे० घोष द्वारा बनाया गया, इस भव्य भवन का एक रेखा चित्र इस रिपोर्ट में सज्जित है | हम आपनी विरसत के प्रति सजग है| हरीतिमा से घिरी इसकी भव्यता का अंकन किसी छाया कार की पहुँच से परे है |

 
 

Office of Accountant General, 20 S.N. Marg, Allahabad, Uttar Pradesh, India

 

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