कोषाधिकारी क्या करे और क्या न करे?

 

 

क्या करे

कोषाधिकारी को देयक पारित करते समय स्वयं को व्यक्तिगत रूप से संतुष्ट होते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि-

1.

राज्य कोषागार नियमो के अंतर्गत जैसा कि आवश्यक है, बिल के उपर के पृष्ठ पर जो विवरण दिया गया है उसका (सही प्रकार से अनुदान संख्या, अंकगणित शुद्धता , अनुदान के उपर बजट प्रावधान, आहरण एवं वितरण अधिकारी कोड आदि सहित छ: स्तरीय वर्गीकरण आदि की ) जाँच कर ली गयी है |
 

2.

केवल उत्तर प्रदेश शासन / विभागाध्यक्षो द्वारा आहरण वितरण अधिकारियो द्वारा देयक प्रस्तुत किये गए है |
 

3.

आहरण वितरण अधिकारी द्वारा देयक में मानक शीर्ष-वार विवरण अनुदान संख्या सहित भरे गए हो, जैसा कि कोषाधिकारी द्वारा भुगतान अनुसूची मे दर्शाया गया है |
 

4.

आहरण वितरण अधिकारी द्वारा देयक के उपर योजनागत / आयोजनागत एवं दतमत /भारित आदि विवरण चिन्हित किया गया है, जैसा कि कोषागार द्वारा भुगतान अनुसूची में दर्शाया गया है |
 

5.

मुख्य शीर्ष ७६१० के अंतर्गत सरकारी कर्मचारियो को दिए जाने वाले ऋण की वापसी की अनुसूची वोउचर्स के साथ सलग्न है, वापसी का प्रकार एवं धनराशि, जो देयक मे दर्शाई गई है; वह शेडयुल में दिए गए विवरण से मेल खा रही है |
 

6.

जैसा कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा उनके बजट मे दर्शाया गया है, प्रत्येक वाउचर में मूल वेतन एवं विभिन्न भत्तो ( महंगाई भत्तो सहित ) की विशिष्ट मानक मदे है | वेतन वाउचर मे प्रत्येक मानक मदों की धनराशियो का ०१- वेतन, ०३- ड़ी०ए० , ०६- ओ०ए०, ५०- ड़ी० पी० के क्रम मे दर्शायी जानी चाहिए | मानक मदों के कोड सही होने चाहिए |
 

7.

आहरण वितरण अधिकारी द्वारा वाउचरो में भरे गए १५ अंको के वर्गीकरण कोषाधिकारी द्वारा दर्शाए गए भुगतानों की अनुसूची के वर्गीकरण के सामान है |
 

8.

सामान्य भविष्य निधि कटोतियो की अनुसुचिया (४७ क ) के साथ वर्गीकरण के अनुसार सलग्न है और कटोतियो की धनराशि वेतन वाउचरो के उपर दर्शायी गयी है|
 

9.

जैसा कि निदेशक कोषागार , उत्तरप्रदेश , लखनऊ द्वारा उनके पत्र संख्या ४८७३ /१ (६२- लेखा) /०५/को० नि० /प्रा० वि दिनांक १३-३-२००६ द्वारा निर्देशित किया गया है, सभी ए० सी० बिल के उपर लाल स्याही से गाढ़े अक्षरों मे ए० सी० बिल लिखी हुई उचित रबर की मोहर लगी है |
 

10.

आहरण वितरण अधिकारी द्वारा प्रस्तुत देयको मे सभी निर्धारित जाँच की गयी है |
 

11.

देयक पारित (पास ) करते समय, वितीय हस्त पुस्तिका एवं अन्य नियमो मे दिए गए सभी नियमो, प्रावधानों, समय समय पर राज्य सरकारों द्वारा निर्गत शासनादेशो एवं महालेखाकार द्वारा समय समय पर जारी निर्देशों का अनुपालन अवश्य होना चाहिए |
 

इसके अतरिक्त कोषाधिकारी व्यक्तिगत रूप से स्वयं संतुष्ट होने के लिए निम्न मदों को भी देखना चाहिए -

1.

पी० एल० ए० महालेखाकार की पूर्व अनुमति से खोले गए है | जो पी० एल० ए० राज्य की समेकित निधि के नामे डाले गए है, वर्ष के अंत मे अवश्य बंद किये जाने चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर पुनः खोले गए है, इसी प्रकार की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पी० एल० ए० १९९८ मे दी गयी है | जिसकी अधिसूचना उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा दिनांक ४.५१९९८ को जारी की गयी है |
 

2.

कोषागार की कार्य विधि के सम्बन्ध मे कार्यालय महालेखाकार से प्राप्त वार्षिक निरिक्षण रिपोर्ट का उत्तर त्वरित गति से भेजा गया है |
 

3.

कार्यालय महालेखाकार के लेखाधिकारियो के नमूना हस्ताक्षर आसानी से उपलब्ध है |
 

4.

जैसा की कोषागार निदेशक द्वारा उनके पत्रांक ४०१८/१०(८८)/२००० /प्लस माईनस मेमो /ड़ी० टी० /टी० सी० दिनांक २८-१२-२००४ द्वारा निर्देशित किया गया है, कोषाधिकारियो द्वारा माह वार धन ऋण ज्ञापन प्रेषित किये जा रहे है |
 

5.

रिज़र्व बैंक जमा ( प्राप्ति एवं भुगतान) की धनराशि भुगतान सूचि अथवा रोकड़ लेखा में सही सही दर्शाई गई है और सत्यापित की गयी है, रिजर्व बैंक जमा का तिथि-वार मासिक विवरण लेखे की द्वितीय सूची के साथ इस कार्यालय को निश्चित रूप से भेजा गया है |
 

6.

राज्य सरकार द्वारा ऋण के विभिन्न शीर्षों के अंतरगत विभिन्न सस्थाओ को स्वीकृत राज्य ऋण स्वीकृत होने का शासनादेश सत्यापन के पश्चात् वाउचर के साथ ऋण स्वीकरण होने का शासनादेश सलागन है और शासनादेश के उपर अयोजनागत अथवा आयोजनेत्तर और दत्तमत अथवा भारित विशेष रूप से चिन्हित किया गया है | इसी प्रकार से ऋण के भुगतान के प्रकरण मे विभाग द्वारा प्रस्तुत किये गए ट्रेजरी चलानो मे ऋण के शासन आदेशो की संख्या ऋण की किश्त संख्या सहित, इस कार्यालय द्वारा सूचित की गई ऋण की एस० एल० आर० संख्या अवश्य होनी चाहिए |

7.

महालेखाकार कार्यालय को मासिक लेखो के साथ भेजे जाने वाले ट्रेजरी चलानो एवं प्राप्तियो की अनुसूचियो मे सामान्य तकावी ऋणों को मुख्या लेखा शीर्ष ६४०१-००-१०८ के अंतरगत सही सही वर्गीकृत किया गया है |

8.

उत्तरप्रदेश राज्य के विकास हेतु ऋणों पर व्याज के समबन्ध मई रिजर्व बैंक द्वारा व्याज की सूचना ( INTEREST WARRANT ) के विपत्रो के भुगतानों को कोषगार द्वारा मुख्य लेखा शीर्ष २०४९-व्याज भुगतान के अंतरगत वर्गीकृत किया जायेगा | उपर्युक्त ऋणों पर सेवा प्रदान करने का मूल्य के भुगतान को मुख्य लेखा शीर्ष ६००३- राज्य सरकार के आन्तरिक ऋण के नामे डाला जाना चाहिए |
 

9.

देयक पारित करते समय, वितीय हस्तपुस्तिका एवं अन्य नियम पुस्तिको मे दिए गए सभी नियमो और प्रावधानों, राज्य सरकार द्वारा निर्गत शासनादेशो एवं महालेखाकार द्वारा समय समय पर निर्गत किये गए निर्देशों का अनुपालन अवश्य किया जाना चाहिए |
 

क्या नहीं करे?
1.

महालेखाकार कार्यालय को मासिक लेखा प्रस्तुत करने के पश्चात् कोषागार के डाटाबेस मे कोई परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए |
 

2.

ऐसे किसी भी लेखा शीर्षों ( मुख्य शीर्ष/ उप मुख्य लेखा शीर्ष/ लघु शीर्ष / उप शीर्ष / मानक शीर्ष ) के अंतरगत जो भारत के नियंत्रक महा लेखा परीक्षक / महालेखा नियंत्रक / राज्य सरकार द्वारा अधिकृत नहीं है; के लेन देनो को महालेखाकार को प्रेषित किये जाने वाले लेखे मे सम्मलित नहीं किया जाना चाहिए |
 

3.

कोई भी राज्य की प्राप्तिया केंद्र के कर राजस्व के शीर्षों ००२०, ००२१, ,००२८, ००३२, ००३७, ००३८, ००४४ (प्राप्ति शीर्षों ) के अंतरगत सम्मलित नहीं किया जाना चाहिए | इन शीर्षों के अंतरगत, भारत सरकार, वित् मंत्रालय से प्राप्त करो के राज्य के हिस्सों के रूप में जो भारतीय रिजर्व बैंक, नागपुर के माध्यम से प्राप्त एवं मंत्रालय से स्वीकृत होने के पश्चात् महालेखाकार द्वारा राज्य के लेखे में संयोजित की गई प्राप्तियो को रखा जाता है |
 

क्या करे ?

कोषाधिकारी को कोषगार सोफ्टवेयर के माध्यम से बनी गई कोषगार की भुगतान सूची एवं रोकड़ लेखा के बारे में स्वयं संतुष्ट होना चाहिए और यह देखना है कि-
1.

जो भुगतान सूची एवं रोकड़ लेखा कोषगार सोफ्टवेयर से तैयार किया गया है, उसमे लेखा शीर्ष ८७९३ अंतर्राजीय उचंत के अंतरगत सम्बंधित राज्य के नाम से सही कोड दर्शाया गया है |
 

2.

८०००० आकस्मिकता निधि के उपर के सभी मुख्य शीर्ष स्तर तक वर्गीकरण किया गया है |
 

3.

भुगतानों क़ी अनुसूची एवं भुगतान सूची क़ी मुख्य लेखा शीर्ष अनुसार धनराशिया एक दुसरे से मेल खा रही है | उसी प्रकार प्राप्तियो क़ी अनुसूची एवं रोकड़ लेखे क़ी धनराशिया भी मेल खा रही है |
 

4.

भुगतान सूची का प्रारंभिक शेष विगत माह के लेखे में दिए गए अंतिम शेष से मेल खा रहा है |
 

5.

भुगतान सूची एवं रोकड़ लेखे के अंतरगत मुख्य लेखा शीर्ष ७६१० (लखु शीर्ष तक ) / ८००० (मुख्य लेखा शीर्ष तक ) ८००९ (उप शीर्ष स्तर तक ) प्राप्ति एवं भुगतानों को धनराशियो प्रकार्यात्मक मुख्य शीर्ष वार दर्शाई गई है और प्रक्रयात्मक मुख्य शीर्ष वार व्यौरा भुगतान सूची/ रोकड़ लेखो मई दर्शाई गई कुल धनराशियों से मेल खा रही है |
 

6.

विभिन्न मंत्रालयों/ रक्षा , डाक एवं तार एवं रेल कार्यालयों आदि के वेतन एवं लेखाधिकारियो की सही कोड संख्या जैसा कि मुख्या लेखा शीर्ष ८६५८ के अंतर्गत दर्शायी जाना अपेक्षित है, को भुगतानों की सूची / रोकड़ लेखे मई दर्शाई गई है |
 

7.

पूंजीगत शीर्षों का प्राप्ति अनुसूचियो से समन्धित अनुदान संख्या सहित सम्पूर्ण वर्गीकरण उल्लिखित है |
 

8.

प्रथम सूची के लेखे मे सभी मुख्य लेखा शीर्षों के अंतर्गत दर्शाए गई भुगतानों के योग द्वितीय सूची के लेखे की भुगतान अनुसूची मे सही-सही दर्शाए गए है |
 

9.

देयक तैयार करते समय वित्तीय हस्तपुस्तिका एवं अन्य नियम पुस्तिको मे दिए गए नियमो एवं प्रावधानों में राज्य सरकार द्वारा निर्गत शासनादेशो एवं समय- समय पर महा लेखाकार द्वारा जरी किये गए निर्देशों का अनुपालन अवश्य किया जाना चाहिए |
 

क्या नहीं करे-
1.

(१) लेखा सत्यापित करते समय कोषागार सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की गई भुगतान सूची एवं रोकड़ लेखा मे स्याही से हाथ द्वारा कोई भी सुधर नहीं किया जाना चाहिए |
 

क्या करे-

महालेखाकार कार्यालय मे प्रथम / द्वितीय सूची के मासिक लेखो को प्रेषित करने से पूर्व कोषाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से स्वयं में संतुष्ट होना चाहिए कि-
1.

कोषागार सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की गई भुगतान सूची एवं रोकड़ लेखे जो महालेखाकार कार्यालय को प्रेषित किये जा रहे है, मे किसी भी कमी का उल्लेख नहीं किया गया है और साफ- साफ तथा सही सही ( दो प्रतियों मे) छपवाए गए है और मासिक लेखे के बण्डल के साथ रखे गए है |
 

2.

प्रत्येक मुख्य शीर्ष से सम्बंधित भुगतान/ प्राप्तियो के लेखे अलग -अलग पकटो मे रखे गए है |
 

3.

भुगतान शीर्ष के प्रत्येक पैकेटो मे सम्बंधित भुगतानों की अनुसूची के साथ सभी वाउचर रखे गए है | ( सम्बंधित मुख्य शीर्ष के सभी वाउचर क्रम से बण्डल मे टैग से अवश्य बंधे जाय |
 

4.

प्राप्ति शीर्ष के प्रत्येक पैकेट मे सभी प्रासंगित सूचनाओ सहित प्राप्ति अनुसूची रखी गई है |
 

5.

प्रत्येक मुख्य लेखा शीर्ष के भुगतान/ प्राप्तियो आदि के अलग अलग पैकटो बैग के अन्दर रखे गए है और महालेखाकार कार्यालय मे देने हेतु भुगतान सूची / रोकड़ लेखा में दर्शाए गए भुगतानों एवं प्राप्तियो से मेल खा रहे है |
 

6.

मासिक लेखा भेजने की तिथि तक के महालेखाकार कार्यालय द्वारा वांछित पिछले माह से लेखे के बण्डल / भुगतानों की अनुसूचिय और अन्य सूचनाओ को भी एक अलग से आवरण के अंतर्गत महालेखाकार कार्यालयों के संभंधित अधिकारी को हस्तगत करने के लिए बैग मे रख लिया गया है ( शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कोषाधिकारी महालेखाकार द्वारा वांछित रिकॉर्ड / सूचनाओ को पंजिका की एक पंजिका का रख रकव करेगा |
 

7.

प्रथम सूची का लेखा उस महीने की १३ तारीख के पूर्व और द्वितीय सूची का लेखा अगले माह की ५ तारीख तक अवश्य पहुँच जाना चाहिए|
 

8.

महालेखाकार कार्यालय को भेजे जाने वाली भुगतान सूची / रोकड़ लेखो की छपी हुई प्राप्तिया पूर्ण, साफ़ एवं पढने योग्य है |
 

9.

सभी भुगतान शीर्षों की भुगतान अनुसूचियो की द्वितीय प्रति भी मासिक लेखो के बंडलो मे एक अलग पैकेट मे रखे गए है |
 

10.

मुख्य लेखा शीर्ष ४४०८, ६००३ से सम्बंधित भुगतानित चेक जो वाउचर की तरह प्रयोग मे लाये जाये गे, के कोषागार एवं पी० एल० ए० आदि द्वारा भुगतानित भारतीय रिजर्व बैंक के ब्याज की सुचना को ल्केखे के प्रथम एवं द्वितीय सूची के लेखे के साथ जैसा भी प्रकरण हो अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जायेगा |
 

11.

मासिक लेखा भेजते समय वितीय हस्त पुस्तिका एवं अन्य नियम पुस्तको मे दिए गए है नियम एवं प्रावधानों राज्य सरकार द्वारा निर्गत किये गए शासनादेशो एवं समय समय पर महालेखाकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनिवार्य रूप से अनुपालन किया गया है |
 

क्या करे -

सभी कर्मचारियो /अधिकारियो (चतुर्थ श्रेणी के अतरिक्त ) के सामान्य भविष्य निधि के सम्बन्ध मे कोषाधिकारी, स्वयं मे संतुष्ट होते हुए, यह सुनिश्चित करेगा कि-
1.

सामान्य भविष्य निधि के जमा कि अनुसूचिया/ चालान / आहरण के वाउचर निर्धारित तिथि तक इस कार्यालय को प्रेषित किये जा रहे है और सार मे दर्शाई गई सभी मुख्य शीर्षों क़ी अनुसूचिया सलग्न है और सारांश सूची मे दर्शाई गई धनराशि से मेल खा रही है |
 

2.

स्थापना के वाउचरो (४७-क ) से सामान्य भविष्य निधि क़ी शत प्रतिशत अनुसूचिया अलग कर ली गयी है और वह महालेखाकार कार्यालय को प्रतिमाह भेजी जा रही है |
 

3.

सलग्न अनुसूचियो को धनराशि, कोषागार कार्यालय द्वारा तैयार क़ी गयी आवरण सूची मे उल्लिखित वाउचरो क़ी धनराशि से मेल खा रही है |
 

4.

ऐसे अधिकारियो क़ी सामान्य भविष्य निधि कटोतिया जो अखिल भारतीय सेवा सवर्ग मे प्रोनत हो गए है किन्तु उन्हें अखिल भारतीय सेवा श्रंखला क़ी भविष्य निधि लेखा संख्या (आई ० ए० एस० यु०, आई० पी० एस० यु०, आई० ऍफ़० एस० यु० ) महालेखाकार कार्यालय द्वारा आवंटित नहीं क़ी गयी है, मुख्य शीर्ष ८००९-०१-१०१-०२ के अंतर्गत दर्शाई गई है और सही प्रकार से अनुसूचिया सलग्न है )|
 

5.

ऐसे सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि क़ी कटोतिया जो तृतीय श्रेणी संवर्ग से प्रोनत हो गए है और उनके सामान्य भविष्य निधि का शेष ट्रेजरी चालान के माध्यम से ट्रान्सफर क्रेडिट द्वारा उनके तृतीय श्रेणी के सामान्य भविष्य निधि लेखे से स्थानांतरित किये गए है, के ट्रान्सफर क्रेडिट क़ी अनुसूचिया/ चालान हर तरह से सलग्न है और अनुसूचियो के उपर विस्तृत वर्गीकरण उल्लिखित है |
 

6.

अंतिम भुगतान प्राधिकार पत्र, जिन पर किन्ही प्रकरणों के भुगतान नहीं हो सका है और वह कालातीत हो गए है; ऐसे प्राधिकार पत्रों को अदेयता प्रमाण पत्र के साथ महालेखाकार कार्यालय को अविलम्ब वापस प्रेषित किया गया है |
 

7.

सेवानिवृत राज्य सरकार के कर्मचारियों को उनके सामान्य भविष्य निधि खाते के ९० % भुगतान ऐसे ही १०% भुगतान / अवशेष राशी मे अभिदाता क़ी सामान्य भविष्य निधि लेखा संख्या महालेखाकार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराये गए मास्टर मे दर्शाई गई लेखा संक्या के सामान है |
 

8.

सामान्य भविष्य निधि अनुसूचियो, चलनो एवं डेबिट वाउचरो के उपर सही सामान्य भविष्य निधि लेखा संख्या और नाम का उल्लेख किया गया है |
 

9.

देयक पारित करते समय वितीय हस्त पुस्तिका एवं अन्य नियम पुस्तको मे दिए गए सभी नियम एवं प्रावधानों, राज्य सरकार द्वारा निर्गत शासनादेशो तथा समय समय पर महालेखाकार द्वारा जारी किये गए दिशा निर्देशों का अनिवार्य रूप से अनुपालन किया गया है |
 

Don'ts
1.

Do not pass the salary bills if the GPF credit schedules are not attached by the DDO as per classification and amount of the deductions shown on the salary bills (47ka) till such bills are corrected by DDOs.
 

2.

No GPF credits or debits should be passed on through defunct series account numbers.